तीन साल जेल में रहा आरोपी,फिर भी ट्रायल अधूरा!
रेवा - 18 में से सिर्फ 8 गवाहों की गवाही, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी मुकदमा पूरा नहीं; लंबी हिरासत और सुनवाई में देरी पर मिली जमानत ! नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में करीब तीन साल से जेल में बंद आरोपी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत दे दी। मामला बैतूल के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। आरोपी 31 मई 2023 से न्यायिक हिरासत में था, लेकिन तीन साल से अधिक समय बीतने के बावजूद अभियोजन के 18 गवाहों में से केवल 8 की गवाही ही पूरी हो सकी।
छह महीने में ट्रायल पूरा करने का आदेश भी बेअसर
आरोपी की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि 14 अक्टूबर 2025 को पिछली जमानत याचिका वापस लेते समय ट्रायल कोर्ट को छह महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया था। निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं हुआ। इसके बाद हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को तीन महीने का अतिरिक्त समय भी दिया, लेकिन इसके बावजूद मुकदमा पूरा नहीं हो सका।
सरकार ने किया विरोध, पीड़िता के बयानों का दिया हवाला राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र करीब 14 वर्ष 9 माह थी। अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने पुलिस के समक्ष धारा 161 और 164 के बयानों में आरोपी के खिलाफ आरोपों का समर्थन किया है और अदालत में भी अभियोजन के मामले का समर्थन किया।
50 हजार के मुचलके पर रिहाई
न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी ने 23 सितंबर 2026 को एमसीआरसी क्रमांक 27865/2026 पर सुनवाई करते हुए आरोपी की लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में हुई देरी को देखते हुए जमानत मंजूर की। आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के सक्षम जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने आरोपी को ट्रायल की प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहने और BNSS की धारा 480(3) के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत का आदेश मामले की अंतिम मेरिट पर कोई राय नहीं है। मामले में आरोपी की ओर से एडवोकेट अमित पांडेय, निखिल सिंह व अजय कुमार पाण्डेय ने पैरवी की।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी

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