कालेज चौराहा के रेस्टोरेंट पर सवालों की बौछार, पत्रकार से कथित अभद्रता ने बढ़ाया विवाद
रेवा : भोजन यहीं बनता है या बाहर से आता है? कर्मचारी के कथित बयान ने खड़े किए बड़े सवाल!FSSAI लाइसेंस, खाद्य आपूर्ति से लेकर गेस्ट हाउस संचालन तक दस्तावेजों की जांच की मांग!सवालों के जवाब देने के बजाय कथित अभद्र व्यवहार का आरोप,अब विभागीय जांच पर टिकी नजर। रीवा जिले के कालेज चौराहा क्षेत्र में संचालित रेस्टोरेंट की कार्यप्रणाली को लेकर अब सवालों की बौछार शुरू हो गई है। प्रतिष्ठान में भोजन तैयार करने की व्यवस्था से लेकर खाद्य लाइसेंस और गेस्ट हाउस संचालन तक कई बिंदु जांच के घेरे में हैं। इसी बीच जानकारी लेने पहुंचे एक पत्रकार के साथ रेस्टोरेंट संचालक द्वारा कथित अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप ने मामले को और गरमा दिया है।मामला तब सामने आया जब पत्रकार ने रेस्टोरेंट में भोजन तैयार किए जाने की व्यवस्था और ग्राहकों के ऑर्डर की आपूर्ति को लेकर जानकारी लेने का प्रयास किया। आरोप है कि मौके पर मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि ऑर्डर मिलने के बाद भोजन दूसरे प्रतिष्ठान 'सांवरिया' से मंगाकर ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है।ऐसे में वास्तविक स्थिति विभागीय निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
बाहर से भोजन आता है तो लाइसेंस में क्या दर्ज है?
कर्मचारी के कथित बयान ने खाद्य संचालन की वैधानिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि वास्तव में भोजन किसी दूसरे प्रतिष्ठान में तैयार होकर यहां पहुंचता है और फिर ग्राहकों को परोसा जाता है, तो यह जांच का विषय है कि संबंधित रेस्टोरेंट के पास किस श्रेणी का FSSAI लाइसेंस या पंजीयन है और उसमें कौन-कौन सी गतिविधियां दर्ज हैं।इसके साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी है कि भोजन उपलब्ध कराने वाले दूसरे प्रतिष्ठान की भूमिका क्या है, खाद्य पदार्थों की खरीद-बिक्री और आपूर्ति का रिकॉर्ड कहां है तथा भोजन के परिवहन, भंडारण और गुणवत्ता से जुड़े खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर पर किया जा रहा है।
रेस्टोरेंट के साथ गेस्ट हाउस भी? कागज सामने लाने की मांग
रेस्टोरेंट के साथ गेस्ट हाउस संचालन की चर्चा ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। सवाल यह है कि मौके पर वास्तव में कौन-कौन सी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और क्या उनके लिए आवश्यक अनुमति एवं पंजीयन उपलब्ध हैं?
जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि—
- प्रतिष्ठान के पास वैध FSSAI लाइसेंस/पंजीयन है या नहीं।
- लाइसेंस में दर्ज गतिविधियां मौके पर संचालित गतिविधियों से मेल खाती हैं या नहीं।
- गेस्ट हाउस संचालन के लिए आवश्यक अनुमति/पंजीयन मौजूद है या नहीं।
- भोजन की खरीद और आपूर्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं।
- बाहर से भोजन मंगाए जाने की स्थिति में उसकी वैधानिक और खाद्य सुरक्षा संबंधी व्यवस्था क्या है।
- खाद्य पदार्थों के भंडारण एवं आपूर्ति के निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
सवाल पूछे तो कथित अभद्रता, जवाब क्यों नहीं?
मामले का दूसरा गंभीर पहलू पत्रकार के साथ कथित अभद्र व्यवहार का आरोप है। आरोप है कि पत्रकार द्वारा प्रतिष्ठान की सामान्य संचालन व्यवस्था और दस्तावेजों से संबंधित जानकारी मांगे जाने पर संचालक ज्ञान सिंह ने जानकारी देने के बजाय कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया।
यदि प्रतिष्ठान का संचालन पूरी तरह नियमों के अनुरूप हो रहा है और संचालक के पास वैध दस्तावेज दस्तावेज उपलब्ध हैं,तो सवालों का जवाब देने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
अब विभाग की बारी कागज पूरे हैं या सवालों में दम?
मामला अब महज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की जरूरत है।
जांच में खास तौर पर यह स्पष्ट होना चाहिए—
1. रेस्टोरेंट के पास वैध FSSAI लाइसेंस/पंजीयन है या नहीं?
2. लाइसेंस में दर्ज गतिविधि और मौके की वास्तविक गतिविधि में समानता है या नहीं?
3. क्या भोजन वास्तव में इसी परिसर में तैयार होता है?
4. यदि भोजन बाहर से आता है तो खरीद और आपूर्ति का रिकॉर्ड क्या है?
5. भोजन उपलब्ध कराने वाले दूसरे प्रतिष्ठान से संबंधित खाद्य सुरक्षा अनुपालन क्या है?
6. गेस्ट हाउस संचालन के लिए आवश्यक अनुमति और पंजीयन मौजूद हैं या नहीं?
7. खाद्य पदार्थों के भंडारण, परिवहन और आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं?
फिलहाल कर्मचारी के कथित बयान और सामने आए आरोपों के आधार पर किसी नियम उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन सवाल इतने गंभीर जरूर हैं कि संबंधित विभाग को दस्तावेजों की जांच और स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यही है क्या जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचकर कालेज चौराहा के इस रेस्टोरेंट की वास्तविक संचालन व्यवस्था की जांच करेगा,या मामला सिर्फ आरोप,सफाई और कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाएगा?
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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