स्थगन आदेश के बाद भी निर्माण जारी रहने का आरोप,न्याय की गुहार लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे ग्रामीण
रीवा : रीवा जिले की सेमरिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बधरा के परौहन एवं गौतमन टोला में आम रास्ते को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। नायाब तहसीलदार सेमरिया द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को स्थगन आदेश जारी किए जाने के बावजूद विवादित स्थल पर निर्माण कार्य जारी रहने का आरोप लगाते हुए ग्रामीण अब कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जहां ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्थगन आदेश का पालन कराने,विवादित रास्ते की जमीन पर निर्माण कार्य रुकवाने और आम रास्ता बहाल कराने की मांग की है।ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।संबंधित मार्ग से बच्चों,महिलाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आवागमन होता है। ऐसे में रास्ता बाधित होने की आशंका से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक,मामले में पहले भी कई शिकायतें की गईं,लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
कई बार शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों ने इससे पहले 22 अक्टूबर को सेमरिया थाना प्रभारी को आवेदन देकर विवादित स्थल पर निर्माण कार्य रुकवाने और आम रास्ते पर आवागमन सुचारू रखने की मांग की थी। आवेदन देने वालों में मोहनलाल द्विवेदी, राजकुमार द्विवेदी सहित परौहन एवं गौतमन टोला के ग्रामीण शामिल बताए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब राजस्व न्यायालय से स्थगन आदेश जारी हो चुका है,तो उसके पालन की कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुकने की शिकायत सामने आने के बाद ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
सेमरिया पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल
मामले में ग्रामीणों ने पुलिस और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद यदि विवादित स्थल पर निर्माण जारी है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आदेश के पालन के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आम रास्ते को लेकर विवाद का निराकरण क्यों नहीं हो सका।
हालांकि, निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति और स्थगन आदेश के पालन को लेकर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। किसी अधिकारी या पक्ष पर दबाव में काम करने का आरोप भी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।
अब कलेक्टर से कार्रवाई की उम्मीद
कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपने वाले ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, स्थगन आदेश का नियमानुसार पालन सुनिश्चित किया जाए और आम रास्ते पर आवागमन बहाल कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते का विवाद लंबा खिंचने से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है, इसलिए प्रशासन को मौके की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
बड़ा सवाल
जब स्थगन आदेश जारी हो चुका है, तो उसके पालन की स्थिति क्या है? ग्रामीणों के बार-बार शिकायत करने और अब कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचने के बाद क्या जिला प्रशासन मौके की जांच कराकर निर्माण कार्य की स्थिति स्पष्ट करेगा? साथ ही, आम रास्ते को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद का समाधान कब होगा, यह अब ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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