दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन

सहरसा : दिव्या ज्योति जागृती संस्थान के द्वारा 18 से 24 फरवरी तक सत्तर कटैया स्थित पदमपुर नजदीक पंचगछिया रेलवे स्टेशन आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया।इस आयोजन में सर्व श्री आशुतोष महाराज की शिष्या भागवत भास्कर विदुषी आस्था भारती के द्वारा प्रवचन कर लोगों का ध्यान आकृष्ट कराया। इस मौके पर मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए जानकारी दी. सुश्री आस्था भारती ने कहा कि सात दिवसीय भागवत कथा के माध्यम से समाज में जागृति का संदेश दिया गया.साथ ही गौशाला उद्घाटन के माध्यम से गौ संवर्धन के लिए लोगों को जागरूक किया गया. क्योंकि गाय का दूध अमृत माना गया है ऐसे में अमृत पान कर समाज यशस्वी और दीर्घायु हो सकता है .दिव्या ज्योति जागृती संस्थान गौ संवर्धन एवं संरक्षण के लिए संकल्पित है.कथा के दौरान ब्रह्मज्ञान और भगवान दिखाने की बात कही गईं,क्या है ब्रह्मज्ञान और कैसे दिखाई देता है भगवान. सुश्री आस्था भारती ने कहा कि ब्रह्म ज्ञान से समाज में अनेक परिवर्तन आया है. ब्रह्म ज्ञान की ध्यान साधना से मन स्थिर हो जाता है. उन्होंने कहा कि सर्वश्री आशुतोष महाराज जी कहते हैं पाप से घृणा करो पापी से नहीं .ऐसे में हम संतो द्वारा जेल में बंद अपराधियों को भी ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से उनमें परिवर्तन लाया है. जो अपराधी पहले प्रतिशोध लड़ने की बात करता था अब वह बदलकर ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से भक्ति मार्ग में लीन हो गया है. उन्होंने कहा कि समाज में सभी समस्याओं का समाधान ब्रह्म ज्ञान से हो रहा है .इस ब्रह्म ज्ञान से समाज राष्ट्र विश्व अवश्य बदलेगा. दिव्या ज्योति जागृती संस्थान कहता है भगवान को देखो.उन्होंने कहा कि ब्रह्म को जान लेना ही ईश्वर से साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करता है. जिस प्रकार अर्जुन ने श्री कृष्ण से कहा क्या हम अपनी आंखों से तत्व का दिव्य दर्शन कर सकते हैं. श्री कृष्ण ने उन्हें दिव्य चक्षु प्रदान कराया तब जाकर विराट स्वरूप का दर्शन संभव हो सका. आज जितना धर्म का प्रचार हो रहा है और जितनी धार्मिक संस्थाए लगे है, उतना ही दुराचार और कुरीतियाँ बढ़ रही है,कैसे होगा सुधार. सुश्री आस्था भारती ने कहा कि गलत सोच के कारण ही मानव अपने राह से भटक जाता है. ऐसे में धार्मिक संस्थाएं उन्हें धर्म की मार्ग से जोड़ता है. कलयुग में धर्म का बोलबाला अज्ञानता के कारण बढ़ रहा है जबकि ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से लोगों के अंदर संस्कार का जागरण कराया जाता है. जिसके माध्यम से लोग धर्म एवं नैतिकता का अनुसरण करते हैं. उन्होंने कहा कि विधर्मियों एवं विदेशी शिक्षा एवं संस्कृति के कारण लोगों में भटकाव आ जाता है लेकिन धार्मिक सत्संग एवं आध्यात्मिक प्रवचन जब उसके अंदर समाहित होता है तब वह पूरा धार्मिक आचरण करने लगता है. सुश्री भारती ने कहा कि जब पांडव स्वर्ग को चले गए तब जाकर के राजा परीक्षित का राज्याभिषेक हुआ. इस समय कलयुग का प्रवेश हुआ .कलयुग ने राजा परीक्षित से पांच स्थान मांगा जिसके अंतर्गत मदिरापान, हिंसा,जुआ परस्त्री गमन एवं अनीति पूर्वक धनार्जन में निवास मांगा।उन्होंने कहा कि इन पांच स्थानों के कारण ही कलयुग हमें परेशान करता है ऐसे में इन पांच चीजों से बचने पर ही धार्मिक बने रह सकते हैं.

रिपोर्टर : अजय कुमार

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