बैंती नदी में डूबे चंदन का दूसरे दिन मिला शव

बैंती नदी में डूबे चंदन का दूसरे दिन मिला शव, पुल निर्माण और मुआवजे की मांग को लेकर 7 घंटे सड़क जाम।

"एक साल से अधूरा पुल, खतरनाक डायवर्सन बना हादसे की वजह"

 समस्तीपुर :- विभूतिपुर थाना क्षेत्र के गंगौली चौक के नजदीक 12 अक्टूबर सोमवार को बैंती नदी में डूबकर लापता हुए 11 वर्षीय चंदन कुमार का शव 13 अक्टूबर मंगलवार को दूसरे दिन बरामद किया गया। गंगौली कॉलोनी वार्ड संख्या 2 निवासी मंगल महतो के पुत्र चंदन का शव मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे राजेश ठाकुर की पुरानी दुकान के पीछे नदी के गहरे पानी में तैरता हुआ मिला। स्थानीय ग्रामीण लोगों और एसडीआरएफ की टीम ने काफी मशक्कत के बाद शव को पानी से खोजकर बाहर निकाला। घटना से आक्रोशित लोगों ने मुआवजे और पुल निर्माण की मांग को लेकर सिंघियाघाट-हरिचक मुख्य सड़क को करीब सात घंटे तक जाम रखा।

"घर के लिए चीनी लाने जा रहा था, तभी नदी में गिरा"

मृतक बच्चे के परिजनों के अनुसार सोमवार दोपहर करीब दो बजे के करीब चंदन घर से लगभग 500 मीटर दूर गंगौली चौक स्थित एक दुकान से चीनी लाने जा रहा था। चौक के नजदीक बैंती नदी पर बना पुराना पुल करीब एक वर्ष पूर्व नए पुल के निर्माण के लिए तोड़ दिया गया था। आवागमन के लिए बनाए गए डायवर्सन के बीच में पानी की तेज धारा बह रही थी। पानी में जलकुंभी भरी हुई है। इसी दौरान चंदन किसी तरह पानी में गिर गया और लापता हो गया। ग्रामीणों ने सोमवार को देर शाम तक उसकी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

"प्रशासनिक पहल में देरी का आरोप, सुबह-सुबह हुआ सड़क जाम"

स्थानीय मुखिया मनोज कुमार यादव ने बताया कि घटना की सूचना सोमवार को ही अंचल अधिकारी को दी गई थी, लेकिन उनके अनुसार प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। मौके पर केवल डायल 112 पुलिस टीम पहुंची थी। इससे नाराज ग्रामीणों ने 13 अक्टूबर मंगलवार की सुबह के करीब छह बजे गंगौली चौक के पास सड़क जाम कर दिया। करीब आठ बजे एसडीआरएफ की टीम पहुंची और ग्रामीणों के साथ खोजबीन शुरू की। इसके बाद सुबह 10:30 बजे चंदन का शव बरामद हुआ।

"आर्थिक रूप से गरीब परिवार की हालत देख मुआवजे की मांग"

चंदन की मां सविता कुमारी ने बताया कि परिवार बेहद गरीबी में जीवन गुजार रहा है। उनके पति मंदबुद्धि हैं और करनाल में मजदूरी करते हैं। परिवार के पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं मिला है। चंदन दूसरी कक्षा का छात्र था और परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी करीब एक वर्षीय बहन अंशिका दिव्यांग है, जिसका समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

"बीडीओ ने दिया 20 हजार का चेक, तब समाप्त हुआ जाम"

जाम के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने, जल्द पुल निर्माण कराने तथा स्थानीय विधायक और ठेकेदार को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा और सांखमोहन पिकेट प्रभारी मनोज पासवान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। शव को भी जाम स्थल पर लाकर रखा गया। बाद में बीडीओ सुनील कुमार ने पंचायत सचिव हरिहर प्रसाद के माध्यम से पीड़ित परिवार को 20 हजार रुपये का चेक उपलब्ध कराया और अन्य सरकारी लाभ जल्द दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम समाप्त हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
ग्रामीणों का कहना था कि यह पुल दोनों ओर के दर्जनों गांवों को जोड़ता है। पुल तोड़े जाने के करीब एक वर्ष बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। मजबूरी में लोग खतरनाक डायवर्सन से गुजर रहे हैं। स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से आते-जाते हैं। ग्रामीणों ने जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इस संबंध में स्थानीय विधायक अजय कुमार ने बताया कि पुल चौड़ीकरण के लिए सरकार ने सूची मांगी थी। जिसमें 6 पुल पास हुआ। तीन पुल बन गया। तीन पुल बनने के लिए सरकार ने कंस्ट्रक्शन को पैसा ही नहीं भेजा, इसके वजह से काम रुक गया है। साखमोहन पीकेट प्रभारी मनोज पासवान ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल समस्तीपुर भेज दिया गया है। आगे की कानूनी प्रकिया चल रही है।

रिपोर्टर राजेश कुमार

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