सतना में बीजेपी जिला अध्यक्ष की शर्मनाक करतूत जूता पहनकर किया दीप प्रज्वलन, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
सतना : सत्ता का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है, तो परंपराएं और संस्कार पीछे छूट जाते हैं। देश की सबसे बड़ी और खुद को 'संस्कारवान' बताने वाली भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न सिर्फ पार्टी की किरकिरी कराई है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया है। मामला मध्य प्रदेश के सतना जिले का है, जहां बीजेपी जिला अध्यक्ष का 'अहंकार' कैमरे में कैद हुआ है।
सतना में बीजेपी जिला अध्यक्ष की शर्मनाक करतूत
जूता पहनकर किया दीप प्रज्वलन, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
ये तस्वीरें गवाह हैं उस सियासी रसूख और गुरूर की, जो अब खुलकर बोलने लगा है। सतना में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर दीप प्रज्वलन की बारी आई, तो मर्यादा की धज्जियां उड़ गईं। एक तरफ सतना के सांसद गणेश सिंह मौजूद थे, जिन्होंने सनातन परंपरा और संस्कारों का सम्मान करते हुए तुरंत अपने जूते उतारे और पूरी श्रद्धा के साथ दीप प्रज्वलित किया। लेकिन ठीक उनके बगल में खड़े बीजेपी के जिला अध्यक्ष भगवती पांडे को शायद परंपराओं से कोई सरोकार नहीं था।
जरा ध्यान से देखिए इन तस्वीरों को। जिला अध्यक्ष भगवती पांडे ने अपने पैर से जूता निकालना भी मुनासिब नहीं समझा। जूते पहने-पहने ही उन्होंने दीप प्रज्वलित कर दिया। दीप प्रज्वलन, जिसे हमारी संस्कृति में पवित्रता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, उसे बीजेपी जिला अध्यक्ष ने अपने अहंकार तले रौंद दिया।
भगवती पांडे की इस करतूत का वीडियो जैसे ही सामने आया, सतना समेत पूरे प्रदेश में इसकी चौतरफा निंदा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को शेयर कर जिला अध्यक्ष को आड़े हाथों ले रहे हैं। लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। यूज़र्स का कहना है कि भगवती पांडे खुद को पार्टी के सिद्धांतों और सनातन परंपराओं से भी ऊपर समझने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर जनता के सवाल:
"क्या सत्ता के नशे में बीजेपी नेता अपने संस्कार भूल गए हैं?"
"सांसद गणेश सिंह ने जूते उतारे, तो जिला अध्यक्ष को किस बात का घमंड था?"
"क्या यही बीजेपी की 'संस्कारवान' राजनीति है?"
सवाल बड़ा है। जो पार्टी हर मंच से 'सनातन और संस्कृति' की दुहाई देती नहीं थकती, उसी पार्टी के जिला अध्यक्ष अगर इस तरह सरेआम मर्यादाओं को तार-तार करेंगे, तो जनता सवाल पूछेगी ही। अब देखना यह है कि इस चौतरफा फजीहत के बाद क्या बीजेपी संगठन अपने इस 'अहंकारी' नेता पर कोई कार्रवाई करता है, या फिर सत्ता के इस गुरूर को यूं ही नजरअंदाज कर दिया जाएगा।
सतना से सूर्य प्रकाश सिंह
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