ग्राम पंचायत तजपुर में करोड़ों रुपए की नल जल योजना ढुस, तीन वर्षों से ग्रामीणों के लिए बनी शोभा की सुपारी
भैरूंदा : ग्राम पंचायत तजपुरा में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित नल-जल योजना विगत तीन वर्षों से ग्रामीणों के लिए शोभा की सुपारी बनकर रह गई है। जलापूर्ति हेतु निर्मित उच्च स्तरीय टंकी का कार्य वर्षों पूर्व पूर्ण हो चुका है, किंतु ग्रामवासियों के घरों तक नलों के माध्यम से पेयजल आज तक नहीं पहुंच सका है।
ग्रीष्म ऋतु में गांव भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। स्थानीय निवासियों ने ग्राम पंचायत, सरपंच-सचिव एवं जल निगम विभाग पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार मुख्य मार्ग के निर्माण कार्य के दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा नल-जल योजना कीमुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त कर दी गई थी, जिसके उपरांत संपूर्ण योजना निष्क्रिय हो गई।
क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के पुनर्निर्माण एवं नवीन पाइपलाइन बिछाने हेतु लोक निर्माण विभाग के माध्यम से जल निगम को लगभग चार माह पूर्व 20 लाख रुपये की राशि जमा कराई जा चुकी है। इसके बावजूद आज तक न तो निविदा प्रक्रिया प्रारंभ हुई है और न ही मरम्मत कार्य शुरू हो सका है।
मंगलवार को जनपद पंचायत सदस्य, वार्ड क्रमांक 17, धर्मेन्द्र सिंह पंवार 'गोलू भैया' अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय, भैरूंदा पहुंचे और आवेदन प्रस्तुत कर अविलंब पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि विभागीय उदासीनता के कारण ग्रामवासी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं इस संबंध में पंवार ने दूरभाष पर जल निगम के अनुविभागीय अधिकारी हिमांशु मिश्रा से चर्चा की मिश्रा ने अवगत कराया कि दस्तावेजों का सत्यापन बुधवार को किया जाएगा तथा 15 मई को निविदा जारी कर दी जाएगी।
हैंडपंपों ने भी छोड़ा साथ :
भीषण गर्मी के कारण गांव के अधिकांश हैंडपंपों का जलस्तर अत्यंत नीचे चला गया है। अनेक परिवारों को दूरस्थ स्थानों से जल लाने के लिए वेवश होना पड़ रहा है। महिलाओं एवं बालकों को प्रतिदिन पेयजल हेतु कठिन परिश्रम करना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये व्यय होने के उपरांत भी योजना का लाभ न मिलने से ग्रामवासियों में गहरा रोष व्याप्त है जनपद सदस्य ने प्रशासन से मांग की है कि अविलंब निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर नवीन पाइपलाइन स्थापित की जाए, जिससे ग्रामवासियों को नल-जल योजना का लाभ प्राप्त हो सके एवं दीर्घकाल से व्याप्त पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
रिपोर्टर : संजय कलमोर

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