समाज के सामूहिक पुरुषार्थ से सामान्य नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना का विकास

शिवहर - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पूरे देश में प्रबुद्धजनों के लिए प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन कर रहा है। उत्तर बिहार प्रांत के प्रांत प्रचारक रवि शंकर सिंह विषयेन ने बताया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विगत 100 वर्षों से राष्ट्र साधना एवं सेवा कार्य में  कार्यरत है। यह यात्रा समाज के सहयोग तथा आशीर्वाद से अत्यंत गौरव में तथा प्रेरणादाई बनी हुई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शिवहर के जिला संघ चालक राजकरण , विभाग संघचालक डॉ रामकिशोर सिंह, कार्यक्रम के मुख्य शिक्षक विनोद कुमार उर्फ हरि जी, नितेश भारद्वाज, प्रेमशंकर पटेल,जिला कार्यवाह अवधेश जी,सह-जिला कार्यवाह अमरेश कुमार,नगर संघचालक अभिराम सिंह, संजय कर्ण, स्पेशल पीपी गणेश कुमार बारी, संजीव कुमार पांडे, नितेश कुमार गिरी, आदित्य कुमार सुरेश आदि मौजूद रहे।

 इस बाबत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर बिहार प्रांत के प्रांत प्रचारक रवि शंकर जी ने बताया है कि समाज के सामूहिक पुरुषार्थ से सामान्य नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना का विकास निरंतर हो रहा है एवं हिंदू दर्शन की स्वीकार्यता देश-विदेश में सर्वत्र बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना ऐसे समय में हुई जब हमारा देश स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहा था, डॉक्टर हेडगेवार का स्पष्ट मत था कि राष्ट्र की स्वतंत्रता उसके पश्चात परम वैभव की प्राप्ति तथा समाज की विभिन्न समस्याओं की स्थाई समाधान केवल हिंदू समाज के संगठित होने से ही होगा।

 उन्होंने कहा कि इन संगोष्ठियों का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करना तथा देश में राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और 'पंचपरिवर्तन' (परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य) जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श करना है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष के पश्चात पांच विषयों पर सज्जन शक्ति के सहयोग से जन जागरण के लिए विशेष प्रयत्न करेंगे जिन्हें पंच परिवर्तन कहा गया है।

डॉ राम किशोर सिंह विभाग संघचालक ने बताया है कि आरएसएस और इसके आनुषंगिक संगठनों द्वारा आयोजित इन जन गोष्ठियों की मुख्य बातों पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के विकास के लिए जो देश के जो संसाधन है उसके आधार पर विकास के मांगों को प्रशस्त करना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य शिक्षक विनोद कुमार उर्फ हरिजी ने कहां हैं कि नारी सशक्तिकरण, जातिगत भेदभाव को मिटाने और समाज में समरसता बढ़ाने पर मंथन जारी है।संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा विभिन्न संगोष्ठियों में जनसांख्यिकीय असंतुलन पर चिंता व्यक्त की गई है और परिवारों से जनसंख्या स्थिरता व स्वस्थ समाज के लिए कम से कम तीन बच्चे अपनाने का आग्रह किया गया है। जिला व्यवस्था प्रमुख राजकिशोर चौधरी ने बताया कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को संजोकर भारत को 'विश्व गुरु' के रूप में स्थापित करने की दिशा में समाज की भूमिका पर जोर।इन आयोजनों के माध्यम से संघ समाज के सभी वर्गों और प्रबुद्धजनों के साथ जुड़कर राष्ट्र निर्माण के सामूहिक संकल्प को बल दे रहा है। 

रिपोर्टर - संजय गुप्ता 

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