डूबा घाट पर शव जालना हुआ मुश्किल

शिवहर - ऐतिहासिक एवं पौराणिक धार्मिक स्थल बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम के पास डूबा पुल के नीचे बागमती नदी के किनारे अब शव जालना अब बहुत मुश्किल गया है। बागमती नदी के डूबा पुल के पश्चिमी तटबंध के ओर कटाव होने से शव जलाने वाले को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तटबंध इतना कट गया है कि मुख्य रास्ता से दोनों साइड उतरी एवं दक्षिणी जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा है। महज 10- 15 फीट वह भी कटाव की ओर है, जिस कारण जलावन ले जाने वाले ट्रैक्टर भी नहीं जाया जा सकता,लोग घाट के मुख्य द्वार जहां पर देवकली धाम मंदिर में जल बोझी करने वाले श्रद्धालुओं के घाट है वहां पर ही शव जला दे रहे हैं। गौरतलब हो कि शिवहर में बागमती नदी पर बने 'डुब्बा पुल' (डुब्बा घाट) के पास स्थित श्मशान घाट को एक आधुनिक और  सुव्यवस्थित मुक्तिधाम के रूप में विकसित किया जा रहा था। इस श्मशान घाट के निर्माण कार्य का स्थानीय स्तर पर बड़ा महत्व है।यह घाट शिवहर के प्रमुख पुलों में से एक, डुब्बा पुल के नीचे/समीप बागमती नदी के किनारे स्थित है।इस निर्माण का मुख्य लक्ष्य अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को बैठने की उचित व्यवस्था, शेड, और पक्के घाट की सुविधा उपलब्ध कराना है ताकि बरसात या बाढ़ के समय परेशानी न हो। शिवहर नगर परिषद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस घाट के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे (शेड, पक्की सीढ़ियां,और दाह संस्कार के लिए प्लेटफॉर्म) के विकास पर ध्यान दिया गया है ताकि यह एक व्यवस्थित स्थल बन सके। परंतु अब ग्रहण लग रहा है। नगर सभापति राजन नन्दन सिंह ने बताया है कि मेरा क्षेत्र नहीं है फिर भी शिवहर शहर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के शव का अंतिम संस्कार डूबा पुल घाट पर किया जाता है। इसको लेकर जिला प्रशासन के सहयोग से बुडको कंपनी के द्वारा 4.50 करोड़ के अधिक की लागत से (मुक्तिधाम )शमशान घाट बनाया जा रहा है। सभापति श्री सिंह ने बताया है कि शीघ्र ही निरीक्षण किया जाएगा। मुक्तिधाम ऐसा बना रहा है जो पानी कटाव का भी असर नहीं पड़ेगा,अगर जरूरत पड़ेगी तो जिला प्रशासन से सहयोग प्राप्त कर इसे दूसरे जगह भी शिफ्ट किया जा सकता है।

रिपोर्टर - संजय गुप्ता

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