मठाधीश बना प्रधान लिपिक मलाई दार पद छोड़ने को राजी नहीं
शामली : बेसिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक आदेशों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा वर्षों से जारी किए जा रहे सम्बद्धीकरण समाप्ति आदेशों के बावजूद कुछ कर्मचारी अब तक अपने मूल तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर रहे हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम प्रधान लिपिक भूमेश कुमार का बताया जा रहा है, जिनके मामले को लेकर विभागीय हलकों में लगातार चर्चाएं बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर द्वारा जारी कार्यालय आदेश संख्या 13807-18/2024-25 दिनांक 20 फरवरी 2025 के माध्यम से प्रधान लिपिक भूमेश कुमार सहित चार कर्मचारियों का जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से सम्बद्धीकरण समाप्त करते हुए उन्हें उनके मूल कार्यालयों एवं विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। आदेश के अनुसार भूमेश कुमार को उनके मूल कार्यालय नगर शिक्षा अधिकारी, शामली में वापस भेजा गया था।
इसी आदेश में वरिष्ठ लिपिक विकास कुमार, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिनेश कुमार तथा अरविंद कुमार को भी उनके मूल तैनाती स्थलों पर भेजने के निर्देश जारी किए गए थे। आदेश में स्पष्ट रूप से "तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त" करते हुए मूल पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने को कहा गया था।
इसके बाद भी विभाग में सम्बद्धीकरण समाप्त करने की कार्रवाई जारी रही। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदेश संख्या 13294-3/2025-26 दिनांक 06 दिसंबर 2025 के तहत मोहित भार्गव का वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में किया गया सम्बद्धीकरण समाप्त कर उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय कांधला भेजा गया। वहीं आदेश संख्या 13378-81/2025-26 के माध्यम से श्रवण कुमार और प्रवीण कुमार के बीच हुआ सम्बद्धीकरण भी शिक्षा निदेशक (बेसिक) के निर्देशों के अनुपालन में समाप्त कर दिया गया था।
लेकिन विभागीय सूत्रों का दावा है कि आदेश जारी होने के बाद भी कुछ कर्मचारी अपने मूल पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के बजाय पूर्ववत व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं। सबसे अधिक चर्चा भूमेश कुमार के मामले की हो रही है, क्योंकि उनके सम्बद्धीकरण समाप्त होने का आदेश फरवरी 2025 में जारी हो चुका था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
विभागीय जानकारों का कहना है कि किसी सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश की अवहेलना सेवा नियमों के अंतर्गत गंभीर अनुशासनहीनता मानी जाती है। ऐसे में यदि सम्बद्धीकरण समाप्ति के आदेशों के बाद भी कर्मचारी मूल कार्यालयों में कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो यह न केवल आदेशों की अनदेखी है बल्कि विभागीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब चर्चा इस बात की है कि जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से स्पष्ट आदेश जारी हो चुके हैं, तो आखिर भूमेश कुमार समेत अन्य कर्मचारियों की वर्तमान तैनाती की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या उन्होंने आदेशों का अनुपालन किया है या नहीं? यदि नहीं किया तो उनके विरुद्ध अब तक कोई विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए तथा यदि आदेशों की अवहेलना सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उधर, इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शामली का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में कई सवाल अब भी जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
रिपोर्टर : अविनाश शर्मा
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