ग्राम रोजगार सेवकों का एल्गार – मानधन के लिए उग्र आंदोलन

शिरूर : पुणे जिले के शिरूर तालुका में ग्राम रोजगार सेवकों का आंदोलन अब उग्र रूप धारण करता जा रहा है। राज्यभर में पुकारे गए कामबंद आंदोलन को यहां भी जोरदार समर्थन मिल रहा है। शासन की अनदेखी से नाराज कर्मचारियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों को पिछले 18 महीनों से मानधन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों पर आजीविका का संकट मंडरा रहा है।
ग्राम रोजगार सहायक संगठन की ओर से आयोजित पत्रकार परिषद में अध्यक्ष श्रीधर महामुनी ने बताया कि शासन द्वारा निर्धारित ₹8000 मानधन, ₹2000 यात्रा भत्ता और 2% प्रोत्साहन भत्ता अब तक नहीं दिया गया है। इससे मजबूर होकर कर्मचारियों ने कामबंद आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
शिरूर तालुका के सभी ग्राम रोजगार सहायकों ने एकजुट होकर आंदोलन में भाग लिया और अपनी मांगों का निवेदन गट विकास अधिकारी महेश डोके को सौंपा। इस दौरान कर्मचारियों ने कहा,
“हम ग्राम पंचायत कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, फिर भी हमारी लगातार उपेक्षा हो रही है।”
प्रमुख मांगें
ग्राम रोजगार सहायकों को पूर्णकालिक कर्मचारी का दर्जा दिया जाए
2 मई 2011 का शासन निर्णय रद्द किया जाए
3 अक्टूबर 2024 के निर्णय को तुरंत लागू किया जाए
बकाया मानधन तुरंत खातों में जमा किया जाए
सभी सहायकों को बीमा सुरक्षा दी जाए
इस आंदोलन को पूरे राज्य में व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे शासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए तालुका अध्यक्ष श्रीधर महामुनी, जिला उपाध्यक्ष रतन शेलके, उपाध्यक्ष शांताराम बहिरट और सचिव अविनाश माने सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं।
“हक के लिए लड़ाई, अन्याय के खिलाफ एल्गार!” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज रहा है। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और तीव्र होने की चेतावनी दी गई है।

संवाददाता : संजय चव्हाण

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