शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

चोपन/सोनभद्र :  मेड़र माता मंदिर परिसर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास दिलीप कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भगवान शिव और माता पार्वती के मंगल विवाह प्रसंग का भावपूर्ण एवं सजीव वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु स्वयं को शिव-पार्वती विवाह का साक्षी महसूस करते रहे और भजनों पर झूमते हुए भगवान के दिव्य विवाह का आनंद लिया।

कथाव्यास ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए महर्षि नारद के निर्देश पर कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने भगवान शिव की अलौकिक बारात और विवाह प्रसंग का अत्यंत रोचक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान उन्होंने माता सती के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने अगस्त्य ऋषि के आश्रम से लौटते समय भगवान श्रीराम के दर्शन किए और उन्हें प्रणाम किया। सती द्वारा श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप धारण करने तथा उसके बाद की घटनाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने मर्यादा और धैर्य का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को भगवान शिव से आदर्श पति बनने की प्रेरणा लेनी चाहिए। कथाव्यास ने आगे बताया कि पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान देखकर माता सती ने यज्ञ को भंग कर अग्नि में प्रवेश किया। बाद में उन्होंने पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लेकर कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव का पुनः वरण किया। शिव-पार्वती विवाह की कथा और भजनों से पूरा कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। कार्यक्रम में चोपन सहित जनपद सोनभद्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


रिपोर्टर :  कुम्धज चौधरी

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.