मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश पर सुल्तानपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकंजा
सुल्तानपुर - उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त निर्देशों के बीच सुल्तानपुर जिले में एंटी करप्शन टीम की सक्रियता बढ़ी है। सरकार की मंशा है कि सरकारी योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता रहे तथा सरकारी काम के बदले रिश्वत या अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पुलिस लाइन परिसर में एंटी करप्शन टीम की व्यवस्था के साथ विभिन्न सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के माध्यम से आम नागरिकों से रिश्वत मांगने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की शिकायत करने की अपील की गई है। संदेश दिया गया है “आपका सहयोग हमारा संकल्प—भ्रष्टाचार मुक्त हो उत्तर प्रदेश।” थाना विभाग में भी शिकायतों पर निगरानी की मांग
थाना विभाग में भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की शिकायतों पर निगरानी बढ़ाने की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि पुलिस विभाग से जुड़े किसी भी सरकारी कार्य में यदि रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। थानों में शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों को निष्पक्ष सुनवाई और नियमानुसार कार्रवाई मिलने की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की भी मांग है।
मोतिगरपुर ब्लॉक में कमीशन के खेल के आरोपों की जांच की मांग मोतिगरपुर ब्लॉक में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को लेकर भी कमीशन के खेल के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों,विकास योजनाओं,आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य सरकारी कार्यों में स्वीकृत धनराशि के मुकाबले मौके पर हुए कार्य की गुणवत्ता और खर्च की जांच जरूरी है। कुछ लोगों का आरोप है कि कुछ मामलों में काम पास कराने, भुगतान कराने अथवा सरकारी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर कमीशन मांगे जाने की चर्चाएं हैं। लोगों की मांग है कि मोतिगरपुर ब्लॉक में स्वीकृत योजनाओं का रिकॉर्ड,कार्यादेश,माप पुस्तिका,बिल-वाउचर और भुगतान विवरण की जांच कर मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए।
यदि किसी मामले में कमीशन अथवा अवैध वसूली के आरोप जांच में प्रमाणित होते हैं तो जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। 2016-17 के आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर गंभीर सवाल मोतिगरपुर ब्लॉक में वर्ष 2016-17 के दौरान स्वीकृत बताए जा रहे कई आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर केवल दीवारें खड़ी हैं और भवन आज तक अधूरे पड़े हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत अथवा भुगतान की गई, लेकिन मौके पर निर्माण अधूरा दिखाई देता है। यदि सरकारी रिकॉर्ड में पूरा भुगतान हुआ है और मौके पर निर्माण अधूरा है तो भुगतान और निर्माण की स्थिति का मिलान कराना आवश्यक है। आंगनबाड़ी की शिकायत मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी तक
आंगनबाड़ी केंद्रों से संबंधित मामले की मुख्यमंत्री स्तर तक शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही जिलाधिकारी को भी मामले से अवगत कराया गया है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि वर्ष 2016-17 से अब तक मोतिगरपुर ब्लॉक में स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों की सूची तैयार कर प्रत्येक केंद्र का भौतिक सत्यापन कराया जाए। जांच में स्वीकृत धनराशि,कार्यादेश,माप पुस्तिका,बिल-वाउचर, भुगतान विवरण और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए। यदि सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए। लेखपाल-कानूनगो की कार्यप्रणाली पर भी निगाह की मांग मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार विरोधी निर्देशों के बीच लेखपाल और कानूनगो की कार्यप्रणाली को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। जमीन की पैमाइश,सीमांकन,चक रोड,नामांतरण,दाखिल-खारिज,कब्जे,घर और भूमि विवादों में राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है।
ग्रामीणों की एक प्रमुख समस्या यह भी बताई जा रही है कि पंचायत भवनों का निर्माण ग्रामीणों की सुविधा के लिए किया गया है, लेकिन कई स्थानों पर लेखपाल नियमित रूप से पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं नहीं सुनते। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सप्ताह में कम से कम एक निर्धारित दिन लेखपाल पंचायत भवन में बैठें तो जमीन,पैमाइश,सीमांकन,नामांतरण,दाखिल-खारिज,चक रोड और अन्य राजस्व संबंधी समस्याओं का प्राथमिक स्तर पर समाधान हो सकता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब पंचायत भवन बनाए गए हैं और वहां बैठने की व्यवस्था उपलब्ध है तो लेखपाल निर्धारित दिन पंचायत भवन में क्यों नहीं बैठते? इस व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही किस अधिकारी की है, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। लोगों की मांग है कि प्रत्येक क्षेत्र में लेखपाल के पंचायत भवन में बैठने का दिन और समय निर्धारित किया जाए तथा इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए,ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
कुछ शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रिपोर्ट लगाने, मौके की जांच कराने अथवा राजस्व प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर कुछ मामलों में पैसे मांगे जाने की शिकायत सामने आती है। लोगों की मांग है कि लेखपाल-कानूनगो की रिपोर्ट,राजस्व अभिलेख और मौके की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष मिलान कराया जाए। चक रोड,जमीन और घर के विवादों में पैसों की मांग के आरोप ग्रामीणों ने विशेष रूप से चक रोड,जमीन की पैमाइश,सीमांकन,घर और भूमि विवादों को लेकर शिकायतें उठाई हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में रिपोर्ट और कार्रवाई के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। यदि किसी कर्मचारी द्वारा सरकारी कार्य के बदले रिश्वत मांगने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही शिकायतकर्ता और संबंधित पक्ष दोनों के दस्तावेजों की जांच कर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए।
जमीन लिखाने और रजिस्ट्री के नाम पर कथित वसूली जमीन की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री और दस्तावेज तैयार कराने के दौरान निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त रकम मांगे जाने के आरोप भी कुछ लोगों ने लगाए हैं। लोगों की मांग है कि निबंधन एवं राजस्व से जुड़े कार्यों में निर्धारित शुल्क की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए और किसी भी अतिरिक्त वसूली की शिकायत की जांच हो।
खबर चलाने पर धमकी का आरोप
आंगनबाड़ी और सरकारी कार्यों में कथित अनियमितताओं से संबंधित खबर मीडिया में प्रकाशित किए जाने को लेकर भी धमकी दिए जाने का आरोप सामने आया है। जनहित के मामलों में उपलब्ध दस्तावेज,मौके की स्थिति और संबंधित पक्ष का बयान लेकर तथ्यात्मक खबर प्रस्तुत करना जरूरी है।
किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर करें शिकायत आम नागरिक भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, सरकारी योजनाओं में अनियमितता या विभागीय लापरवाही से संबंधित शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई-समाधान (IGRS) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर उसकी स्थिति देखी जा सकती है।
एंटी करप्शन टीम से शिकायत
जिले में लगाए गए जागरूकता पोस्टरों पर रिश्वत संबंधी शिकायत के लिए 9454402484 हेल्पलाइन नंबर और aco@nic.in ई-मेल की जानकारी दी गई है। शिकायतकर्ता से अपेक्षा है कि उपलब्ध दस्तावेज, आवेदन, फोटो, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखें, जिससे शिकायत की जांच में मदद मिल सके।
सरकार के सख्त निर्देशों के बाद कार्रवाई का इंतजार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार विरोधी सख्त रुख के बीच अब लोगों की नजर मोतिगरपुर ब्लॉक, आंगनबाड़ी केंद्रों, थाना विभाग, राजस्व विभाग, लेखपाल-कानूनगो और जमीन से जुड़े मामलों पर है। पंचायत भवनों में लेखपालों के निर्धारित दिवस पर बैठने और ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान कराने की व्यवस्था भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। लोगों को उम्मीद है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार, कमीशन या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नोट: मोतिगरपुर ब्लॉक,आंगनबाड़ी केंद्रों,लेखपाल-कानूनगो,थाना विभाग अथवा अन्य कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए रिश्वतखोरी,कमीशन,वसूली या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य सरकारी कार्यों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग के अभिलेख,भुगतान विवरण, मौके के सत्यापन और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। मुख्यमंत्री अथवा जिलाधिकारी स्तर पर शिकायत किए जाने की बात शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध जानकारी के आधार पर कही गई है। संबंधित पक्ष का बयान भी महत्वपूर्ण रहेगा।
संवाददाता - दिनेश सिंह अग्निवंशी
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