पनीर के नाम पर क्या खा रहे हैं आप? असली और एनालॉग पनीर का पूरा सच

 

सफेद, मुलायम और देखने में बिल्कुल पनीर जैसा...लेकिन हर टुकड़ा दूध से बना हो, यह जरूरी नहीं

पनीर का नाम सुनते ही दिमाग में दूध से बना मुलायम और स्वादिष्ट पनीर आता है। लेकिन अगर आपकी प्लेट में रखा पनीर दूध से बना ही न हो तो? बाजार में एनालॉग पनीर नाम का ऐसा विकल्प मौजूद है, जो देखने और खाने में काफी हद तक असली पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन इसकी पूरी कहानी दूध से शुरू नहीं होती। यही वजह है कि इन दिनों एनालॉग पनीर चर्चा में है।

आखिर क्या होता है एनालॉग पनीर?

सीधी भाषा में समझें तो एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है, जिसमें असली डेयरी पनीर के कुछ प्रमुख घटकों की जगह दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाता है। इसे तैयार करने में वनस्पति तेल या वनस्पति वसा, स्टार्च, सोया या मटर प्रोटीन, मिल्क पाउडर, स्टेबलाइजर और इमल्सीफायर जैसी सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है। इन चीजों को मिलाकर पनीर जैसी बनावट और शक्ल तैयार की जाती है।

यानी दिखने में पनीर, लेकिन जरूरी नहीं कि पूरा पनीर हो।

असली पनीर की कहानी बिल्कुल अलग है

असली पनीर का आधार दूध है। दूध को गर्म करने के बाद एसिड की मदद से फाड़ा जाता है। इससे दूध के ठोस हिस्से अलग होते हैं, जिन्हें दबाकर पनीर तैयार किया जाता है। इसलिए असली पनीर की पहचान ही उसका डेयरी आधार है।

इसके मुकाबले एनालॉग पनीर में वनस्पति वसा और प्लांट प्रोटीन जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही अंतर दोनों उत्पादों को एक-दूसरे से अलग करता है।

फिर एनालॉग पनीर की जरूरत क्यों पड़ी?

इसका एक बड़ा कारण लागत है। डेयरी दूध की कीमतों और उत्पादन लागत की तुलना में वनस्पति वसा और दूसरे विकल्पों से तैयार उत्पाद सस्ता पड़ सकता है। यही वजह है कि ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल फूड सर्विस सेक्टर में होने की बात सामने आती रही है।

लेकिन असली परेशानी तब होती है, जब ग्राहक को यह बताया ही न जाए कि उसकी प्लेट में असली डेयरी पनीर है या एनालॉग उत्पाद।

होटल-रेस्तरां में मामला ज्यादा गंभीर क्यों?

आप किसी होटल या रेस्तरां में पनीर की सब्जी ऑर्डर करते हैं। मेन्यू में लिखा है ‘पनीर’, कीमत भी पनीर की ही है और प्लेट में सफेद टुकड़े भी बिल्कुल पनीर जैसे दिख रहे हैं। ऐसे में आम ग्राहक यह कैसे जाने कि उसे वास्तव में क्या परोसा गया है?

यहीं से लेबलिंग और उपभोक्ता की जानकारी का सवाल खड़ा होता है। किसी दूसरे उत्पाद को असली पनीर के रूप में पेश करना ग्राहक को भ्रमित कर सकता है।

महाराष्ट्र में क्यों हुई कार्रवाई?

एनालॉग पनीर को लेकर महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा जांच के बाद कार्रवाई हुई। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जांचे गए 308 पनीर और डेयरी-एनालॉग नमूनों में 109 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 30 नमूनों को असुरक्षित घोषित किया गया। इसके बाद महाराष्ट्र में एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल की रोक लगाई गई। होटल, रेस्तरां, कैटरर्स और क्लाउड किचन को भी इसके इस्तेमाल को लेकर निर्देश दिए गए।

क्या हर एनालॉग पनीर जहरीला है?

नहीं। यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। एनालॉग होना और असुरक्षित होना एक ही बात नहीं है। किसी उत्पाद की सुरक्षा उसकी सामग्री, निर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता और लागू खाद्य मानकों पर निर्भर करती है।

असल सवाल यह है कि उत्पाद क्या है, उसमें क्या इस्तेमाल हुआ है और ग्राहक को उसके बारे में सही जानकारी दी जा रही है या नहीं।

आम ग्राहक कैसे रहे सावधान?

पैकेट वाला पनीर खरीदते समय सबसे पहले लेबल पढ़ें। उत्पाद का नाम, सामग्री और अन्य जरूरी जानकारी देखें। केवल सफेद रंग, मुलायम बनावट या स्वाद के आधार पर असली और एनालॉग पनीर में अंतर करना आसान नहीं होता।

बहुत कम कीमत पर मिलने वाले पनीर को लेकर भी सतर्क रहें और भरोसेमंद विक्रेता से ही खरीदारी करें।

अगली बार पनीर खाते समय एक सवाल जरूर पूछिए

आपकी प्लेट में रखा पनीर दिखने में बिल्कुल असली हो सकता है, लेकिन उसकी असली पहचान पैकेट की तस्वीर या सिर्फ स्वाद से नहीं होगी। पनीर खरीदते या खाते समय यह जानना आपका अधिकार है कि आखिर वह बना किस चीज से है।

इसलिए अगली बार जब होटल में गरमा-गरम पनीर की डिश सामने आए या बाजार से पनीर खरीदें, तो सिर्फ यह न देखें कि वह कितना मुलायम है—यह भी जानिए कि वह दूध से बना है या किसी विकल्प से।

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