शैलेश धात्रक और मनीषा धात्रक के राजनीतिक सफर की भावुक कहानी

ठाणे : डोंबिवली पश्चिम के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं, जिनकी पहचान केवल चुनाव या पद तक सीमित नहीं रहती। उनकी असली पहचान जनता के सुख-दुःख में साथ खड़े रहने और सेवा भाव से काम करने की होती है। शैलेश धात्रक और मनीषा धात्रक ऐसा ही एक दंपति हैं, जिन्होंने वर्षों तक डोंबिवली के लोगों के दिलों में अपनी अलग और अटूट जगह बनाई।

साल 2005 में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था। मुंबई सहित कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र के हजारों परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उस कठिन समय में, जब लोग अपनी जान बचाने में व्यस्त थे, तब समाजसेवा की भावना से प्रेरित शैलेश धात्रक लोगों की मदद के लिए सड़कों पर उतर आए। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को भोजन, आवश्यक सामग्री और मानसिक सहारा उपलब्ध कराया। संकट के उस दौर में उनका सहयोग अनेक परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन गया।

इसी कार्य को देखते हुए कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव में जनता ने शैलेश धात्रक और मनीषा धात्रक पर भरोसा जताया। भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए दोनों विजयी हुए। जनता ने जो विश्वास उन पर जताया था, उसे उन्होंने अपने कार्यों से सही साबित किया।

उस समय डोंबिवली पश्चिम रेलवे स्टेशन क्षेत्र में बढ़ते फेरीवालों की समस्या से नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। भीड़, अतिक्रमण और यातायात की अव्यवस्था के कारण आम लोग त्रस्त थे। ऐसे में शैलेश धात्रक और मनीषा धात्रक ने पहल करते हुए स्टेशन परिसर को फेरीवालामुक्त बनाने के प्रयास किए। नागरिकों को खुली हवा में चलने, सुरक्षित यात्रा करने और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए किए गए उनके प्रयास आज भी लोगों को याद हैं। उनके काम से प्रभावित होकर डोंबिवली की जनता ने अगली बार भी उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना।

डोंबिवली पूरे महाराष्ट्र में "सांस्कृतिक शहर" के रूप में पहचाना जाता है। इस शहर की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को बनाए रखने का कार्य धात्रक दंपति ने पूरे समर्पण के साथ किया। डोंबिवली पश्चिम में नागरिकों के लिए कई अभिनव और जनहितकारी योजनाएं लागू करने में वे हमेशा आगे रहे।

महिलाओं के लिए आधुनिक सार्वजनिक शौचालय, नागरिक सुविधाएं, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, भव्य दही हांडी उत्सव, 15 अगस्त और 26 जनवरी के देशभक्ति समारोह, गुड़ी पड़वा के आयोजन तथा दत्त जयंती पर हजारों लोगों के लिए महाप्रसाद का आयोजन उनके कार्यों की प्रमुख उपलब्धियां हैं। उन्होंने केवल विकास कार्य ही नहीं किए, बल्कि डोंबिवली की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान की।

2018 में नगरसेवकों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कई वर्षों तक चुनाव नहीं हुए। इसी दौरान पूरी दुनिया को हिलाकर रख देने वाली कोरोना महामारी आई। लाखों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे थे। ऐसे कठिन समय में भी शैलेश धात्रक और मनीषा धात्रक नागरिकों की सहायता के लिए मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने जरूरतमंदों तक राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाने का काम लगातार जारी रखा।

नगरसेवक पद न होने के बावजूद उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी और भाजपा के लिए काम करते रहे। लेकिन 2026 के चुनाव से पहले राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं। पुराने कार्यकर्ताओं को अवसर देने के निर्णय के कारण धात्रक परिवार को केवल एक टिकट दिए जाने की बात सामने आई। वर्षों तक पार्टी और जनता की सेवा करने के बावजूद अपेक्षित प्रतिनिधित्व न मिलने से उन्हें एक कठिन निर्णय लेना पड़ा।

जनता के प्रेम और अपने कार्यों पर विश्वास रखते हुए शैलेश धात्रक ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना में प्रवेश किया। वार्ड क्रमांक 25 से शैलेश धात्रक, मनीषा धात्रक और पूजा धात्रक ने चुनाव लड़ा। लेकिन भाजपा से वर्षों पुराना भावनात्मक रिश्ता, प्रचार के लिए बेहद कम समय और बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अंततः तीनों उम्मीदवार चुनाव हार गए।

लेकिन चुनावी हार से जनता के दिलों में उनके लिए मौजूद सम्मान और प्रेम कम नहीं हुआ। आज भी डोंबिवली पश्चिम के कई नागरिक धात्रक परिवार के कार्यों को याद करते हैं। चुनाव के कई महीने बाद भी लोगों के बीच यह भावना दिखाई देती है कि धात्रक परिवार जैसा हर समस्या में साथ देने वाला, आसानी से उपलब्ध रहने वाला और जनता से आत्मीय रिश्ता रखने वाला नेतृत्व आज भी लोगों को चाहिए।

आज भी नागरिकों के मन में एक ही सवाल है— डोंबिवली पश्चिम के विकास और समाजसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले इस कार्यकर्ता की राजनीतिक यात्रा अब किस दिशा में जाएगी?

शैलेश धात्रक आगे कौन-सा राजनीतिक रास्ता चुनेंगे, किस दल के माध्यम से जनता की सेवा करेंगे या किस नई भूमिका में लोगों के सामने आएंगे, इस पर पूरे डोंबिवली पश्चिम की नजर टिकी हुई है।

लेकिन एक बात निर्विवाद है— चुनाव में जीत और हार राजनीति का हिस्सा हो सकती है, मगर जनता के दिलों में बनाई गई जगह किसी भी पद से बड़ी होती है। समाजसेवा, जनता से जुड़ाव, सांस्कृतिक विरासत को बचाने का प्रयास और संकट के समय दिया गया सहारा, इन सब कारणों से शैलेश धात्रक और मनीषा धात्रक का नाम डोंबिवली पश्चिम के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

आख़िरी सवाल अब भी अनुत्तरित है...

जिस नेतृत्व पर डोंबिवली पश्चिम ने दो दशकों से अधिक समय तक भरोसा किया, जिसके दरवाज़े आम नागरिकों के लिए हर समय खुले रहते थे, वह नेतृत्व एक बार फिर जनता की सेवा के लिए किस रूप में सामने आएगा?

क्योंकि चुनाव में हार किसी नेता का अंत हो सकती है, लेकिन एक सच्चे समाजसेवक का नहीं।

"नेता तो बहुत आते और जाते हैं, लेकिन लोगों के दुःख में उनके आँसू पोंछने वाले, संकट में सहारा बनने वाले और जनता के दिलों में घर कर जाने वाले समाजसेवक बहुत कम होते हैं। इसलिए आज भी डोंबिवली पश्चिम के अनेक नागरिकों के मन में एक ही भावना है— शैलेश धात्रक जैसे जमीनी समाजसेवक को खोना नहीं चाहिए।"

रिपोर्टर : दीपक मोरे

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