मास स्पेक्ट्रोमेट्री से ब्रेन टीबी की पहचान आसान, लोहिया संस्थान के अध्ययन ने दिखाई नई उम्मीद
BY- PRAKAHR SHUKLA
जानिए आखिर कैसे होती है टीबी-
टीबी एक गंभीर संक्रामक रोग है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होता है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके बावजूद इसके कई मामले शरीर के अन्य हिस्सों—गुर्दे, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी—तक फैल जाते हैं। इनमें सबसे खतरनाक स्थिति ब्रेन टीबी या ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस (TBM) मानी जाती है, जिसकी देर से पहचान होने पर मृत्युदर काफी बढ़ जाती है। तीसरे चरण के रोगियों में मौत की संभावना 75 प्रतिशत तक रहती है।यदि समय रहते बेहतर उपचार किसी रोगी को मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
टीबी के इलाज में टैंडम मास स्पेक्ट्रोमेट्री साबित हुई कारगर-
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के चिकित्सकों ने इस गंभीर बीमारी की जांच को लेकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के विशेषज्ञों—प्रो. विक्रम सिंह, डॉ. मृदु सिंह, प्रो. मनीष कुलश्रेष्ठ और डॉ. जूही वर्मा—के संयुक्त अध्ययन में पाया गया कि टैंडम मास स्पेक्ट्रोमेट्री की मदद से ब्रेन टीबी का तेज और अत्यधिक सटीक निदान संभव है। यह तकनीक एक ही माप में कई अणुओं की पहचान कर सकती है और पारंपरिक विधियों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हुई है। अध्ययन न्यूरोलॉजिकल साइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
टीबी रोगियों के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर-
यूपी में टीबी के मामले देश में सबसे अधिक हैं। 2024 में राज्य में लगभग 6.7 लाख टीबी रोगी दर्ज हुए, जिनमें करीब 35 हजार ब्रेन टीबी के मामले थे। इसके अलावा मध्य प्रदेश , बिहार , महाराष्ट्र ,में भी टीबी के मामले सर्वाधिक पाए जाते हैं । अध्ययन में शामिल 172 मरीजों के सीएसएफ नमूनों में कई बायोमार्कर जांचे गए, जिनमें माइकोलिक और टीबीएसए के स्तर को मास स्पेक्ट्रोमेट्री से मापा गया। इस तकनीक की सफलता दर 93 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विधि संभावित और निश्चित मेनिनजाइटिस के बीच स्पष्ट अंतर कर सकती है और कम बैक्टीरियल लोड वाले मरीजों में भी रोग की पहचान कर सकती है। यह उपलब्धि ब्रेन टीबी की मृत्युदर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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