उल्हासनगर में सियासी हलचल तेज: 27 सितंबर से पहले ‘स्वीकृत नगरसेवकों’ की नियुक्ति का आदेश, आयुक्त–महापौर के फैसले पर उठे सवाल
उल्हासनगर : महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। जानकारी के मुताबिक, 7 पदों पर स्वीकृत नगरसेवकों की चयन प्रक्रिया को लेकर पहले अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद 27 सितंबर से पहले नियुक्ति पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि नगर आयुक्त द्वारा इस प्रक्रिया को स्थगित करने का निर्णय लिया गया था, जिस पर आपत्ति जताते हुए मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। न्यायालय ने संबंधित आदेश को रद्द करते हुए प्रक्रिया को समयसीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है, जिससे प्रशासन को बड़ा झटका माना जा रहा है। इस पूरे मामले में भाजपा नेताओं ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। शहराध्यक्ष द्वारा अदालत में चुनौती देने के बाद अब नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, इस फैसले के बाद आयुक्त और महापौर के निर्णयों पर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विवाद गहराया
इस घटनाक्रम के बाद उल्हासनगर की राजनीति में खींचतान और तेज हो गई है। खासतौर पर शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ने की चर्चा जोरों पर है।
आयुक्त की भूमिका पर सवाल
आयुक्त द्वारा प्रक्रिया रोकने के फैसले को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। भाजपा नेताओं ने इस निर्णय पर संदेह जताते हुए आयुक्त के कार्यकाल की जांच और तबादले की मांग तक कर डाली है।
निष्कर्ष:
उल्हासनगर में स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह पूरी तरह से राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़ा सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।
रिपोर्टर : साबीर शेख
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