सहारनपुर विधानसभा का इतिहास कांग्रेस से भाजपा और सपा तक, जानिए चुनावी सफर

 
सहारनपुर जिले की देवबंद विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखती है। धार्मिक और शैक्षणिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेती-किसानी और स्थानीय व्यापार के लिए भी जाना जाता है। देवबंद की चुनावी राजनीति ने कई दशक में अलग-अलग रंग देखे हैं। कभी कांग्रेस का दबदबा रहा, तो कभी जनता दल, भाजपा, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की।
 
देवबंद की सियासत में नेताओं का व्यक्तिगत प्रभाव और राजनीतिक दलों का जनाधार दोनों महत्वपूर्ण रहे हैं। वर्ष 2002 और 2007 में बसपा ने यहां जीत दर्ज की, 2012 में समाजवादी पार्टी को सफलता मिली, जबकि 2017 और 2022 में भाजपा के बृजेश सिंह विधायक चुने गए। इन परिणामों से साफ है कि देवबंद में राजनीतिक मुकाबला लगातार बदलता रहा है और हर चुनाव ने यहां नए समीकरण बनाए हैं।
 
देवबंद विधानसभा का इतिहास
 
शुरुआती चुनावों में कांग्रेस की मजबूत स्थिति देवबंद विधानसभा के चुनावी इतिहास की शुरुआत स्वतंत्रता के बाद हुई। शुरुआती चुनावों में कांग्रेस का प्रभाव दिखाई दिया। 1952 के चुनाव में ठाकुर फूल सिंह और हरदेवा कांग्रेस के उम्मीदवारों के रूप में विजयी हुए। उस समय विधानसभा की कुछ सीटों पर एक से अधिक सदस्य चुने जाने की व्यवस्था थी। 1957 में भी देवबंद से दो प्रतिनिधि चुने गए, जिनमें हरदेवा कांग्रेस और यशपाल सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए।
 
1962 के चुनाव में फूल सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद 1967 में भी कांग्रेस ने अपनी स्थिति बनाए रखी। हालांकि, अगले चुनावों में दूसरे दलों ने चुनौती देनी शुरू कर दी।
 
1969 से 1989 तक: महावीर सिंह का प्रभाव और राजनीतिक बदलाव
1969 के विधानसभा चुनाव में महावीर सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद 1974 में भी वह विधायक चुने गए। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के मोहम्मद उस्मान ने कांग्रेस को हराकर जीत दर्ज की। लेकिन 1980 में महावीर सिंह ने फिर वापसी की और 1985 तथा 1989 के चुनावों में भी जीत हासिल की।
 
इस दौर में देवबंद की राजनीति में कांग्रेस का प्रभाव काफी हद तक बना रहा। महावीर सिंह की लगातार सफलताओं ने उन्हें क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में शामिल किया। वहीं 1977 का परिणाम बताता है कि प्रदेश और देश की राजनीतिक परिस्थितियों का असर देवबंद के मतदाताओं के फैसले पर भी पड़ा।
 
इस दौर में कब कौन जीता:
चुनाव वर्ष विजयी उम्मीदवार राजनीतिक दल
1969 महावीर सिंह कांग्रेस
1974 महावीर सिंह कांग्रेस
1977 मोहम्मद उस्मान जनता पार्टी
1980 महाबीर सिंह कांग्रेस (आई)
1985 महावीर सिंह कांग्रेस
1989 महावीर सिंह राणा कांग्रेस
1990 के दशक में जनता दल और भाजपा का उभार
 
1991 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के वीरेंद्र सिंह ने जीत हासिल की। इसके बाद 1993 में भाजपा की शशि बाला पुंडीर विधायक बनीं। वर्ष 1996 में भाजपा के सुखबीर सिंह पुंडीर ने जीत दर्ज की। इस तरह देवबंद की राजनीति में कांग्रेस के पारंपरिक प्रभाव के साथ भाजपा का जनाधार भी मजबूत होने लगा।
 
इस दशक के चुनावों में राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। भाजपा ने लगातार दो चुनावों में जीत दर्ज करके अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि जनता दल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
 
1990 के दशक के प्रमुख विजेता:
 
 
चुनाव वर्ष विजयी उम्मीदवार राजनीतिक दल
1991 वीरेंद्र सिंह जनता दल
1993 शशि बाला पुंडीर भाजपा
1996 सुखबीर सिंह पुंडीर भाजपा
 
 
वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र सिंह राणा ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद 2007 में मनोज चौधरी बसपा के उम्मीदवार के रूप में विधायक बने। इन दोनों चुनावों में बसपा की सफलता ने देवबंद की राजनीति में पार्टी की मजबूत मौजूदगी को सामने रखा।
 
इस दौर में भाजपा और बसपा के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण रहा। बसपा ने लगातार दो चुनावों में जीत दर्ज करके यह साबित किया कि देवबंद में मतदाता कांग्रेस और भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक विकल्पों को भी समर्थन देते रहे हैं।
 
इस दौर में कब कौन जीता:
 
 
चुनाव वर्ष विजयी उम्मीदवार राजनीतिक दल
2002 राजेंद्र सिंह राणा बसपा
2007 मनोज चौधरी बसपा
 
2012 में समाजवादी पार्टी की जीत
2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के राजेंद्र सिंह राणा ने जीत दर्ज की। उन्होंने बसपा के मनोज चौधरी को 3,050 मतों के करीबी अंतर से हराया। इस चुनाव ने देवबंद में सपा की राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया।
 
राजेंद्र सिंह राणा इससे पहले 2002 में बसपा के टिकट पर भी विधायक चुने गए थे। बाद में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उनकी जीत ने क्षेत्र की राजनीति में दलों और नेताओं के बदलते समीकरणों को उजागर किया।
 
2016 के उपचुनाव में माविया अली की जीत
वर्ष 2016 में देवबंद विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस के माविया अली ने जीत हासिल की। उन्होंने समाजवादी पार्टी की मीना सिंह को 3,559 मतों से हराया।
 
यह परिणाम देवबंद की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उपचुनाव में कांग्रेस ने सफलता हासिल कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। हालांकि, अगले ही वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में सीट का राजनीतिक समीकरण फिर बदल गया।
 
2017 में भाजपा के बृजेश सिंह बने विधायक
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के बृजेश सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के माजिद अली को 29,400 मतों से हराया। बृजेश सिंह को 1,02,244 वोट मिले, जबकि माजिद अली को 72,844 वोट प्राप्त हुए।
 
इस जीत के साथ भाजपा ने देवबंद में अपनी स्थिति मजबूत की। वर्ष 2016 में कांग्रेस के माविया अली की जीत के बाद 2017 में भाजपा की सफलता ने यह दिखाया कि यहां मतदाताओं का रुझान चुनाव-दर-चुनाव बदल सकता है।
 
2022 में भाजपा ने दोहराई जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बृजेश सिंह पर फिर भरोसा जताया और उन्होंने जीत दर्ज की। इस बार समाजवादी पार्टी के कार्तिकेय राणा ने उन्हें कड़ी चुनौती दी, लेकिन बृजेश सिंह 7,104 मतों से विजयी रहे।
 
बृजेश सिंह को 93,890 वोट मिले, जबकि कार्तिकेय राणा को 86,786 वोट प्राप्त हुए। बसपा के चौधरी राजेंद्र सिंह को 52,732 वोट मिले। इस परिणाम ने देवबंद में भाजपा की लगातार दूसरी विधानसभा चुनाव की जीत दर्ज कराई।
 
2022 के चुनाव के प्रमुख परिणाम:
 
 
उम्मीदवार राजनीतिक दल प्राप्त वोट
बृजेश सिंह भाजपा 93,890
कार्तिकेय राणा समाजवादी पार्टी 86,786
चौधरी राजेंद्र सिंह बसपा 52,732
उमैर मदनी एआईएमआईएम 3,501
राहत खलील कांग्रेस 1,096
देवबंद विधानसभा के प्रमुख विधायक: पूरी सूची
देवबंद विधानसभा के पुराने चुनावों और हाल के परिणामों के आधार पर विजेताओं की सूची इस प्रकार है। शुरुआती वर्षों में कुछ चुनावों में एक से अधिक प्रतिनिधि चुने जाने की व्यवस्था थी।
 
 
चुनाव वर्ष विजयी उम्मीदवार राजनीतिक दल
1952 ठाकुर फूल सिंह कांग्रेस
1952 हरदेवा कांग्रेस
1957 यशपाल सिंह निर्दलीय
1957 हरदेवा कांग्रेस
1962 फूल सिंह कांग्रेस
1967 पी. सिंह कांग्रेस
1969 महावीर सिंह कांग्रेस
1974 महावीर सिंह कांग्रेस
1977 मोहम्मद उस्मान जनता पार्टी
1980 महाबीर सिंह कांग्रेस (आई)
1985 महावीर सिंह कांग्रेस
1989 महावीर सिंह राणा कांग्रेस
1991 वीरेंद्र सिंह जनता दल
1993 शशि बाला पुंडीर भाजपा
1996 सुखबीर सिंह पुंडीर भाजपा
2002 राजेंद्र सिंह राणा बसपा
2007 मनोज चौधरी बसपा
2012 राजेंद्र सिंह राणा समाजवादी पार्टी
2016 (उपचुनाव) माविया अली कांग्रेस
2017 बृजेश सिंह भाजपा
2022 बृजेश सिंह भाजपा
नोट: पुराने चुनावों में उम्मीदवारों के नाम, वर्तनी और कुछ दलों की पहचान अलग-अलग चुनावी अभिलेखों में भिन्न मिल सकती है। प्रकाशन से पहले निर्वाचन आयोग के मूल रिकॉर्ड से मिलान करना उचित होगा।
 
देवबंद विधानसभा के प्रमुख स्थानीय मुद्दे
देवबंद की राजनीति में स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहां खेती-किसानी, ग्रामीण सड़कों, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दे मतदाताओं के लिए अहम हैं। इसके अलावा देवबंद की धार्मिक और शैक्षणिक पहचान के कारण क्षेत्र से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक विषय भी सार्वजनिक चर्चा में रहते हैं।
 
स्थानीय बाजारों, छोटे कारोबार, परिवहन सुविधाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में सुधार भी क्षेत्र की विकास संबंधी जरूरतों में शामिल हैं। इन मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों का काम और जनता से उनका संपर्क चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
 
देवबंद विधानसभा का इतिहास बताता है कि यह सीट किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी गढ़ नहीं रही। शुरुआती दशकों में कांग्रेस का प्रभाव रहा, 1990 के दशक में भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत की, 2000 के दशक में बसपा को सफलता मिली और 2012 में समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा के बृजेश सिंह ने लगातार दो चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।2022 में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला यह बताता है कि देवबंद में प्रमुख दलों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। आने वाले चुनावों में विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याएं और स्थानीय जरूरतें महत्वपूर्ण रहेंगी। आखिरकार किसी भी विधायक की असली पहचान इस बात से बनती है कि वह अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाता है और उनके समाधान के लिए कितना प्रभावी काम करता है।

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