वाशिम के भटउमरा में नववधू ने पेश की मिसाल, शादी मंडप से सीधे पहुंची परीक्षा देने

वाशिम : महाराष्ट्र के वाशिम तालुका के भटउमरा गांव की एक प्रेरणादायी घटना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। समाजकार्य की छात्रा और नववधू वैष्णवी संतोष काळे ने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिन—शादी के दिन—भी शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सीधे शादी मंडप से परीक्षा देने पहुंचकर एक आदर्श प्रस्तुत किया है। 28 अप्रैल 2026 को वैष्णवी का विवाह ज्ञानेश्वर राजू चौधरी (निवासी भटउमरा) के साथ संपन्न हो रहा था। इसी दौरान निर्धारित समय पर परीक्षा देना आवश्यक होने के कारण वैष्णवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के मंडप से निकलकर पारंपरिक शादी के वेश में ही वाशिम स्थित राजस्थान महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर दोपहर 2 से 5 बजे तक अपनी परीक्षा दी। पारंपरिक वेशभूषा में नववधू को परीक्षा देते देख परीक्षा केंद्र के विद्यार्थी और शिक्षक भी आश्चर्यचकित रह गए। वैष्णवी की इस लगन और शिक्षा के प्रति निष्ठा की सभी ने सराहना की है। कई लोगों ने इस घटना को “शिक्षा प्रथम” के विचार का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।

वैष्णवी ने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को सशक्त बनाती है और वह बाबासाहेब के संदेश तथा राजमाता जिजाऊ और सावित्रीबाई फुले के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प रखती हैं। वह वाशिम के श्री रामराव सरनाईक समाजकार्य महाविद्यालय की बीएसडब्ल्यू तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। वैष्णवी के इस निर्णय की स्थानीय नागरिकों, शिक्षकों और सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने सराहना की है। उनके इस साहसिक कदम से भटउमरा गांव का नाम भी गर्व से लिया जा रहा है और यह घटना विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणादायी बन गई है।

रिपोर्टर - नागेश अवचार

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